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General Shayari

मैने बहुत से ईन्सान देखे है

मैने बहुत से ईन्सान देखे है, जिनके बदन पर लिबास नही होता। और बहुत से लिबास देखे है, जिनके अंदर ईन्सान नही होता । कोई हालात नहीं समझता , कोई जज़्बात नहीं समझता , ये तो बस अपनी अपनी समझ है , कोई कोरा कागज़ भी पढ़ लेता है तो कोई पूरी किताब नहीं समझता!

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